27.11.06

देश विदेश का साहित्य हिन्दी में

अनुनाद भाई ने एक बहुत शुभ समाचार चिठ्ठाकार समूह पर भेजा। इसे पढ़ कर दिल प्रसन्न हो गया। सोचा कि इस लिंक को सहेज लूं, बाद में काम आएगा।

समाचार दुर्भाग्य से अंग्रेजी में ही मिला, हिन्दी में नहीं मिल पाया। इसलिये जो पाठक अंग्रेजी नहीं पढ़ सकते, उनको बता दूं कि अब देश विदेश का साहित्य हिन्दी में पहले की अपेक्षा अधिक मिलेगा क्योंकि अनुवादक लोग बढ़ रहे हैं। एक और अच्छी बात ये है कि ये अनुवाद मूल भाषा से हिन्दी में सीधे हो रहे हैं, अंग्रेजी के रास्ते नहीं - इससे अनुवाद की गुणवत्ता श्रेष्ठतर ही होगी।

पूरा समाचार यहां पढ़ें।

1 टिप्पणी:

अनुनाद सिंह ने कहा…

जिस प्रकार हिन्दी अन्य माध्यमों में अपनी सम्मानजनक उपस्थिति दर्शा रही है( जैसे प्रिन्ट और एलेक्ट्रानिक माध्यमों में), लगता है हिन्दी एक और क्रान्ति का दर्शन करेगी - हिन्दी पुस्तकों के प्रकाशन की क्रान्ति। शायद यही क्रान्ति हिन्दी क्षेत्र के विकास का भी कपाट खोल दे!